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राजा और चार रानियाँ

  राजा और चार रानियाँ एक दृष्टांत कथा जीवन के सत्य का बहुत समय पहले की बात है, एक विशाल और समृद्ध राज्य पर एक प्रतापी राजा राज करता था। उसका प्रताप दूर-दूर तक फैला था, और उसके वैभव की कोई सीमा नहीं थी। जैसे-जैसे वह राजा वृद्धावस्था की ओर बढ़ रहा था, उसके जीवन की संध्या ढल रही थी। राजा के चार रानियाँ थीं — चारों अनुपम सुंदर, गुणों से भरपूर, परंतु राजा का प्रेम उनमें बराबर नहीं था। वह अपनी  चौथी रानी , राजकुमारी लावण्या से सबसे अधिक प्रेम करता था। लावण्या अपनी अप्रतिम सुंदरता, नृत्य और संगीत में निपुणता के लिए विख्यात थी। राजा उसके रूप-लावण्य पर इस कदर मुग्ध था कि उसके लिए उसने राज्य के कोष का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया था। हर दिन वह लावण्या के कक्ष में अधिक समय बिताता, उसे नए आभूषण और रेशमी वस्त्र भेंट करता। इसके बाद, राजा का दूसरा सबसे अधिक प्रेम  तीसरी रानी , महारानी विजया पर था। विजया अपने तीखे बुद्धिबल, राजनीतिक कौशल और राज्य के वित्तीय मामलों में उसकी सहायता करने के लिए जानी जाती थी। राजा अक्सर उससे सलाह लेता और उसके सुझावों पर कार्य करता। वह उसके साथ बैठकर राज्य की नीत...