माँ चंद्रघंटा

 माँ चंद्रघंटा: शांति और शौर्य की देवी


बहुत समय पहले की बात है, जब संसार में दानवों और राक्षसों का आतंक बढ़ता जा रहा था। वे निर्दोष लोगों को सताते, यज्ञ और तपस्या में विघ्न डालते, और धर्म का उपहास उड़ाते। देवता भी उनके अत्याचारों से भयभीत हो उठे और सभी ने देवी शक्ति की आराधना की। उनकी प्रार्थना सुनकर, माँ दुर्गा ने अपने तीसरे स्वरूप—माँ चंद्रघंटा—का प्रकट किया।


शौर्य और सौम्यता का संगम


माँ चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला था। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान था, जिससे वे चंद्रघंटा कहलाईं। उनके दस हाथों में अलग-अलग शस्त्र शोभायमान थे, और वे अपने सिंह पर सवार थीं। जब उनका घंटा बजता, तो उसकी भयंकर ध्वनि से बड़े-बड़े असुर थर्रा उठते। किंतु जो भी भक्त श्रद्धा और प्रेम से माँ के दर्शन करता, उसे अद्भुत शांति और सुरक्षा का अनुभव होता।


राक्षसों का विनाश


देवताओं की प्रार्थना पर माँ ने अपने अद्भुत तेज और पराक्रम से दानवों के सेनापति महिषासुर और उसके सैन्यबल को पराजित कर दिया। जैसे ही उनका घंटा निनादित हुआ, युद्धभूमि में अराजकता फैल गई। दुष्टों की सेना काँप उठी, उनके अस्त्र-शस्त्र निष्प्रभावी हो गए, और वे भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगे। माँ ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का अंत कर दिया, और चारों ओर धर्म और शांति की स्थापना हुई।


भक्तों के लिए माँ का आशीर्वाद


माँ चंद्रघंटा केवल युद्ध और पराक्रम की देवी नहीं हैं, वे भक्तों के लिए शांति और कल्याण की प्रतीक भी हैं। उनकी कृपा से उनके भक्तों को साहस और निर्भयता प्राप्त होती है, साथ ही उनके स्वभाव में मधुरता और सौम्यता का भी विकास होता है। जो लोग क्रोधी होते हैं, छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाते हैं या जीवन में अत्यधिक तनाव महसूस करते हैं, उन्हें माँ की आराधना करनी चाहिए। उनके घंटे की ध्वनि हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और भय से रक्षा करती है।


माँ की उपासना और कृपा


नवरात्र के तीसरे दिन जब साधक माँ चंद्रघंटा की पूजा करते हैं, तो उनके भीतर अद्भुत परिवर्तन आने लगता है। उनकी आँखों में तेज, वाणी में मधुरता, और हृदय में साहस भर जाता है। माँ की आराधना से भक्त चिरायु, आरोग्यवान, सुखी और समृद्ध हो जाते हैं।


माँ चंद्रघंटा हमें यह सिखाती हैं कि जीवन में केवल पराक्रम ही महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि धैर्य, सौम्यता और विनम्रता भी उतनी ही आवश्यक हैं। जो व्यक्ति माँ के आशीर्वाद से अपनी शक्ति को सही दिशा में लगाता है, वह संसार में सफलता प्राप्त करता है और अपने चारों ओर शांति और प्रेम का वातावरण बनाता है।


जय माँ चंद्रघंटा!


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