जीवन का अनमोल पाठ
🌿 जीवन का अनमोल पाठ — एक गुरु और उसके शिष्यों की कथा — बहुत पुरानी बात है। एक शांत, हरे-भरे जंगल के बीचों-बीच एक आश्रम था — गुरु शारदानंद जी का आश्रम। वहाँ दूर-दूर से बच्चे शिक्षा लेने आते थे। गुरुजी का आश्रम सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं था, वहाँ जीवन जीने की कला सिखाई जाती थी। उस दिन की सुबह कुछ अलग थी। सूरज की किरणें जैसे धीरे-धीरे धरती को जगाने आई हों। पक्षियों की चहचहाहट वातावरण में संगीत घोल रही थी। मगर आश्रम के भीतर… एक अजीब सी शांति थी। शिष्य रोज़ की तरह अपने आसनों पर बैठे थे, पर आज गुरुजी के चेहरे पर कुछ अलग ही भाव थे — गंभीर, लेकिन प्रेमपूर्ण। गुरुजी ने अपने शिष्यों को देखा और बोले — गुरुजी (धीरे-धीरे): “बच्चों, आज हम न श्लोक पढ़ेंगे, न कोई ग्रंथ खोलेंगे। आज जीवन की वह शिक्षा दी जाएगी, जो न किताबों में मिलती है, न किसी पाठशाला में। यह पाठ तुम्हारे जीवन का रास्ता बदल सकता है।” सभी शिष्य चुपचाप गुरुजी को देखने लगे। कुछ के चेहरे पर जिज्ञासा थी, कुछ के मन में हलचल। तभी गुरुजी उठे और रसोई की ओर चल दिए। थोड़ी देर बाद वे तीन बर्तनों के साथ लौटे। पहले बर्तन में ए...